फिलिस्तीन आने के बाद इन यहूदियों ने येहवेह को ईश्वर के रुप में मान्यता दी। यहूदियों के ईश्वर #येहवेह का यहूदियों को आदेश है कि वे अपने रहने की जगह की पहचान बलि चढाए गये भेड के बच्चे के खून को छिडक कर करें, अन्यथा येहवेह उनके व इजिप्ट के लोगों के पहले क्रम के बच्चों को मार डालेगा।
येहवेह अपने सिवा किसी और की पूजा करना पसंद नही करता है। यहूदियों का जुडिया (Judea) यानि येरुशलम में पहले इनका कोई खुद का मंदिर नही था, बल्कि वे स्थानीय रूप से बनाई गयी बलिवेदी पर ही अपने देवता येहवेह (Yehveh) के लिए बलि चढ़ाते थे।
येहवेह ने यहूदियों को इजराइल यानि "ईश्वर के रक्षक" यहूदी-धर्म नाम दिया। यहूदी-धर्म के दस आदेशों में प्रमुख आदेश निम्नलिखित बताए गये हैं:-
(Durant Will, p 307, 309, 310, 313, 328, 329, the story of civilization: Our oriental heritage)
संकलित: त्रि-इब्लिसी शोषण-व्यूह-विध्वंस-1
p222-223:
Previous parts👇
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 1
Next parts👇
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 3
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 4
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 5
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 6
अपौरुषेय-बाणी
बाबा-राजहंस
येहवेह अपने सिवा किसी और की पूजा करना पसंद नही करता है। यहूदियों का जुडिया (Judea) यानि येरुशलम में पहले इनका कोई खुद का मंदिर नही था, बल्कि वे स्थानीय रूप से बनाई गयी बलिवेदी पर ही अपने देवता येहवेह (Yehveh) के लिए बलि चढ़ाते थे।
येहवेह ने यहूदियों को इजराइल यानि "ईश्वर के रक्षक" यहूदी-धर्म नाम दिया। यहूदी-धर्म के दस आदेशों में प्रमुख आदेश निम्नलिखित बताए गये हैं:-
- पहले आदेश के तहत धर्म के प्रति किसी विद्रोह या परिवर्तन को सहन नही किया जावेगा। ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा दी जायेगी। यहूदी-धर्म के प्रति पूर्ण आस्था' यहूदी सामाजिक जीवन की पहली शर्त है।
- पांचवें क्रम के आदेश के अनुसार परिवार के मुख्य व्यक्ति के हाथ में असीमित सत्ता दी गई है, यहाँ तक की गरीब यहूदी बाप अपनी बेटी को बेच सकता था। परिवार के अन्य सदस्यों पर' उसकी आज्ञा का पालन करना अनिवार्य था।
- छठवें आदेश के अनुसार यहूदियों की यह मान्यता है की वे ईश्वर द्वारा इस दुनिया पर राज करने के लिए चुने गये सर्वश्रेष्ठ लोग हैं। इसी कारण यहूदी अन्य सभी लोगों को अपने से नीच मानते हैं।
- सातवें आदेश के तहत विवाह महत्वपूर्ण संस्था मानी गयी है, अत: विवाह के समय स्त्री को अपने सतित्व को साबित करने के लिए असहनीय पत्थरों की मार सहनी पडती थी।हालांकि यहूदियों में वेश्यावृत्ति भी पाई जाती है जो इनके आर्थिक विकास के साथ जुडी हुई है और कीमत देकर पत्नि (वधू) हासिल की जा सकती थी।बायबल में जकोब (जैकब) ने लिह तथा रचेल को प्राप्त करने के लिए उनके पिता के यहाँ निश्चित समय तक कडा परिश्रम किया था। विधवा का विवाह मृतक के करीबी रिश्तेदार से किया जाता था।
- आठवें आदेश के अनुसार मनुष्य को व्यक्तिगत सम्पत्ति को मान्यता दी गई है। येहवेह के आदेशानुसार यहूदी दूसरे लोगों को कर्जा देंगे, लेकिन दूसरे से कर्जा नही लेंगे। इस तरह यहूदियों में शोषण को धार्मिक मान्यता दी गई है। दूसरे धर्म के लोगों द्वारा कर्जा नही चुकाने की स्थिति में उन्हें गुलाम बनाया जाता था। फिर कर्ज में डूबा व्यक्ति अपना कर्ज उतारने के लिए, अपने बीवी बच्चों को भी बेचना पडता था।
- नौवें आदेश के अनुसार गवाही में पूरी ईमानदारी बरती जानी चाहिए, इसलिए गवाही की रस्म धार्मिक रीत का स्थान रखती थी।यहूदी-धर्म के पूराने नियम के अनुसार जिसकी शपथ ली जा रही है, उस व्यक्ति के जननेन्द्रिय पर हाथ रखकर ही गवाह शपथ लेता था। मगर बाद में येहवेह के नाम पर शपथ लेने की परम्परा कायम हुई। इनके मंदिर के पुजारी जज और मंदिर ही कोर्ट-कचहरी हुआ करते थे।
- दसवें आदेश के अनुसार औरतों को पुरुष की जायदाद मानी जाती थी। इनके पुजारी ही बलि चढ़ाने की विधि करने का हकदार था तथा यहूदी पुजारियों का एक विशेष सुविधा सम्पन्न वर्ग था।
(Durant Will, p 307, 309, 310, 313, 328, 329, the story of civilization: Our oriental heritage)
संकलित: त्रि-इब्लिसी शोषण-व्यूह-विध्वंस-1
p222-223:
Previous parts👇
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 1
Next parts👇
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 3
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 4
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 5
दुनियां मे यहूदी और यहूदीवाद भाग 6
अपौरुषेय-बाणी
बाबा-राजहंस

No comments:
Post a Comment