नई दिल्ली: CBI जज बीएच लोया की मौत के मामले दायर याचिका के मामला :
सुप्रीम कोर्ट ने 16मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था| जज लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे जिस मामले मे बीजेपी नेता अमित शाह आरोपी थे |
मामला पेंडिग पड़ा था फैसला सुनाने से पहले ही जज बीएच लोया की हृद्याघात की वजह से मौत हो गयी थी | मृत्यु के बाद कोर्ट ने फैसले मे अमित शाह को आरोप मुक्त कर दिया था |
संदिग्ध मृत्यु के कारण सभी विपक्षी पार्टियों ने इस केस की जांच SIT से करवाने की अपील की थी |
इसी केस संबंधित गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की SIT जांच नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी एकबार फिर कांग्रेस पर हमलावर हो गई |
जांच न कराने के लिए कोर्ट की तरफ से रखे गए मुख्य बिंदु
- जजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना अवमानना है
- आपसी मतभेद मिटाने के लिए कार्ट का सहारा न लें
- जनहित याचिका का मजाक बनाया गया है
- जज लोया की सामान्य मृत्यु हुई इसमें कोई शक नहीं
- जस्टिस लोया के साथ जो जज आखिरी वक्त तक थे
- उनके बयान पर शक करने का कोई आधार नहीं है
- इस मामले की एसआईटी जांच नहीं कराई जाएगी
- कारोबारी या राजनीतिक झगड़े कोर्ट के बाहर निपटाएं
- पीआईएल की आड़ में कोर्ट का वक्त बर्बाद न करें
- जजों को बदनाम करने की कोशिश की गई
यही मुख्य कारण है इस केस मे सुप्रीमकोर्ट ने जांच कराने से इनकार कर दिया है




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